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गोवर्धन पूजा एवं कृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु


गोवर्धन पूजा एवं कृष्ण की बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

भगवान का स्मरण और भक्ति जीवन के सभी संकटों को दूर करने का सबसे सरल उपाय : आचार्य शशांक शेखर महाराज

भोपाल। राजधानी भोपाल के दानापानी रोड स्थित ईश्वर नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक आचार्य शशांक शेखर महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी बाल लीलाओं एवं गोवर्धन पूजा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए आचार्य शशांक शेखर महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम, करुणा और सदाचार का संदेश देने वाली हैं। उन्होंने माखन चोरी, ग्वाल-बालों के साथ क्रीड़ाएं, कालिया मर्दन, पूतना वध, अघासुर एवं बकासुर वध सहित माता यशोदा के वात्सल्य प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया।

गोवर्धन पूजा प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार का नाश करने और प्रकृति संरक्षण का संदेश देने के लिए गोवर्धन पर्वत की पूजा का महत्व बताया था। इंद्र के क्रोधित होकर मूसलाधार वर्षा करने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण कर समस्त ब्रजवासियों की रक्षा की थी।

आचार्य शशांक ने कहा कि यह प्रसंग हमें अहंकार त्यागकर प्रकृति, गौ सेवा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान का स्मरण एवं सच्ची भक्ति जीवन के सभी संकटों को दूर करने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर होकर भगवान श्रीकृष्ण के भजनों पर झूम उठे तथा पूरे परिसर में "राधे-राधे" और "जय श्रीकृष्ण" के जयघोष गूंजते रहे।





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